दक्षिण सूडान 15 वर्ष पर: कैसे राजनीतिक अभिजात वर्ग ने युद्ध के साथ-साथ शांति से लाभ कमाने का रास्ता खोज लिया है 07.07.2026

सूडान से 2011 में दक्षिण सूडान की स्वतंत्रता का उद्देश्य दशकों से चल रहे गृहयुद्ध को समाप्त करना था, लेकिन सत्ता और संसाधनों को लेकर हुए आंतरिक संघर्षों के कारण 2013 में फिर से युद्ध छिड़ गया और 2018 में बार-बार होने वाली देरी के साथ एक नाजुक शांति समझौता हुआ। एक आर्थिक इतिहासकार का तर्क है कि शांति समझौतों ने देश की दमनकारी राजस्व प्रणालियों को समाप्त नहीं किया है, बल्कि इसके बजाय उन्हें औपचारिक रूप दे दिया है, जिससे एक "शोषक शांति" (predatory peace) की स्थिति पैदा हो गई है जहाँ हिंसा युद्ध के मैदानों से हटकर चेकपॉइंट और करों जैसे निष्कर्षण तंत्रों (extraction mechanisms) की ओर स्थानांतरित हो गई है। राजनीतिक अभिजात वर्ग तेल, सीमा शुल्क और सहायता जैसे राजस्व स्रोतों को नियंत्रित करके लाभ कमाता है, जिससे राज्य एक आकर्षक पुरस्कार बन जाता है जिसके लिए लड़ना सार्थक है। एक व्यवसायी द्वारा "संगठित लूट" के रूप में वर्णित यह प्रणाली इसलिए बनी हुई है क्योंकि भ्रम और ओवरलैपिंग अधिकार जवाबदेही को रोकते हैं। लेख का निष्कर्ष है कि वास्तविक शांति के लिए पारदर्शी, नागरिक-नियंत्रित राजस्व प्रणालियों और सार्वजनिक वस्तुओं से भुगतान को जोड़ने की आवश्यकता है, जिसे बाहरी शर्तों और नागरिक निगरानी द्वारा समर्थन दिया जाना चाहिए।














